
जम्मू-कश्मीर में युवाओं के लिए एक नई उम्मीद की किरण उभरी है। ‘असिस्टेंट बुककीपिंग ट्रेनिंग’ कोर्स सरकारी सहयोग से न केवल मुफ्त है बल्कि करियर की नई ऊंचाइयों तक ले जा रहा है।
यह कार्यक्रम 18 से 35 वर्ष के बेरोजगार युवाओं को लक्षित करता है। पहले बैच में 500 से अधिक ने नामांकन कराया। तीन माह की ट्रेनिंग में जीएसटी, टैली, लेखा सॉफ्टवेयर और वित्तीय प्रबंधन की पूरी ट्रेनिंग दी जाती है।
केंद्र शासन सारा खर्च वहन कर रहा – फीस, सामग्री, लैपटॉप और स्टाइपेंड तक। कोर्स कोऑर्डिनेटर ने बताया, ‘यह ट्रेनिंग नहीं, जीवन का नया अध्याय है।’
ट्रेनी अब लोकल बिजनेस, एमएसएमई और स्टार्टअप्स में नौकरियां पा रहे। श्रीनगर की आइशा अब 18 हजार की नौकरी कर रही, जबकि गुलमर्ग के एक युवा ने टूरिज्म फर्म जॉइन की।
क्षेत्र में लेखाकारों की कमी को पूरा करने वाला यह प्रयास आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम। सफलता के आंकड़े बताते हैं – 40 प्रतिशत रोजगार वृद्धि।
ग्रामीण क्षेत्रों में चुनौतियां हैं, लेकिन मोबाइल यूनिट्स से समाधान हो रहा। यह कार्यक्रम संघर्षग्रस्त इलाके में समृद्धि का प्रतीक बन रहा।