
दुनिया के प्रमुख आर्थिक मंच दावोस सम्मेलन में झारखंड की प्राचीन मेगालिथिक विरासत को वैश्विक पटल पर प्रस्तुत किया जाएगा। यह कदम राज्य की पुरातात्विक समृद्धि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
झारखंड के पहाड़ी इलाकों में बिखरी हजारों मेगालिथिक संरचनाएं—मेनहिर, डॉल्मेन और स्टोन सर्कल—पाषाण युग की सभ्यताओं की गाथा कहती हैं। ये स्मारक लगभग 1500 ईसा पूर्व के हैं और दफन स्थल, खगोलीय वेधशालाओं के रूप में उपयोग होते थे।
राज्य सरकार ने पुरातत्व सर्वेक्षण ऑफ इंडिया के सहयोग से एक बहुआयामी प्रदर्शनी तैयार की है, जिसमें 3डी मॉडल, वर्चुअल टूर और दुर्लभ कलाकृतियां शामिल हैं। इसका उद्देश्य संरक्षण के लिए वैश्विक निवेश आकर्षित करना और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देना है।
पर्यटन मंत्री ने कहा, ‘हमारी मेगालिथिक साइटें मानव प्रतिभा का प्रतीक हैं।’ दावोस का मंच इन प्राचीन रहस्यों को सतत विकास से जोड़ेगा।
यह प्रस्तुति न केवल झारखंड की पहचान मजबूत करेगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति भी देगी। वैश्विक नेता इन पत्थरों के संदेश से प्रेरित हो सकते हैं।