
सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को मनी लॉन्ड्रिंग केस में महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है। चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगा दी और प्रवर्तन निदेशालय को नोटिस जारी किया।
कोर्ट ने ED से कहा कि आपके पास कई बड़े मामले हैं, उन पर ध्यान केंद्रित करें। अखबारों में पढ़ा कि आपने ढेर सारे केस दर्ज किए हैं, अपनी ऊर्जा प्रमुख जांचों में लगाएं ताकि बेहतर नतीजे मिलें। यह टिप्पणी हल्के लहजे में की गई, लेकिन इसका असर गहरा था।
पृष्ठभूमि में, ED ने सोरेन के सहयोगी से 8.86 एकड़ जमीन के कागजात जब्त किए, जिसके बाद PMLA के तहत केस दर्ज हुआ। रांची मजिस्ट्रेट ने IPC की धारा 174 के तहत समन जारी किया, हाईकोर्ट ने इसे बरकरार रखा। सोरेन की SLP पर SC ने यह अंतरिम आदेश दिया।
ED का दावा था कि सोरेन ने सात समन नजरअंदाज किए, जबकि उनके वकील मुकुल रोहतगी ने बताया कि तीन बार पेशी पर गिरफ्तारी हुई। पहले भी सोरेन इस मामले में गिरफ्तार हो चुके हैं।
झारखंड की सियासत में यह फैसला मील का पत्थर साबित हो सकता है। विधानसभा चुनावों से पहले सोरेन की स्थिति मजबूत हुई है। ED को अब जवाब देना होगा, जबकि कोर्ट गहन सुनवाई की तैयारी कर रहा है। यह निर्णय जांच एजेंसियों और राजनेताओं के बीच संतुलन की याद दिलाता है।