
झारखंड के गिरिडीह निवासी विजय कुमार महतो का शव सऊदी अरब के जेद्दा से करीब चार महीने बाद भारत पहुंचा, लेकिन परिवार ने इसे लेने से साफ इनकार कर दिया। विजय की मौत अक्टूबर 2025 में हुई थी, जब वे एक ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। पुलिस और गैंग के बीच गोलीबारी में वे फंस गए और गंभीर रूप से घायल हो गए।
शनिवार को मुंबई経由 रांची एयरपोर्ट पर शव आया और उसे रिम्स मोर्चरी में रख दिया गया। मृतक के साले राम प्रसाद महतो ने बताया कि कंपनी की ओर से मुआवजे पर लिखित आश्वासन न मिलने तक शव नहीं लेंगे। उन्होंने कहा, विजय से गहरा लगाव है, लेकिन उनकी पत्नी, पांच और तीन साल के दो बेटों व बुजुर्ग माता-पिता का भविष्य भी सोचना पड़ता है।
परिवार का रुख स्पष्ट है- कंपनी कुछ ठोस बताए। झारखंड सरकार ने 5 लाख रुपये की तत्काल सहायता का ऐलान किया है, मगर नियोक्ता की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। माइग्रेंट कंट्रोल सेल प्रमुख शिखा लाकड़ा के अनुसार, मामला सऊदी अदालत में विचाराधीन है। अंतिम मुआवजा कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगा।
सरकार ने दूतावास के माध्यम से शव वापसी में सहयोग किया, लेकिन विदेशी क्षेत्राधिकार वाले केस में भूमिका समन्वय तक सीमित है। यह घटना प्रवासी मजदूरों की असुरक्षित जिंदगी को उजागर करती है। विदेश में मेहनत करने वाले हजारों भारतीयों के लिए मजबूत सुरक्षा जाल जरूरी है, ताकि परिवारों को दोहरी मार न झेलनी पड़े। फिलहाल मोर्चरी में शव पड़ा है और तनाव बरकरार।