
झारखंड को नक्सल हिंसा से मुक्त करने की दिशा में सुरक्षाबल ने सराहनीय सफलता हासिल की है। पश्चिम सिंहभूम के चाईबासा स्थित सारंडा के घने जंगलों में चली मुठभेड़ में 15 नक्सली ढेर हो गए। इनमें भाकपा माओवादी की केंद्रीय समिति का प्रमुख सदस्य अनल दा उर्फ पतिराम मांझी भी शामिल है, जिस पर एक करोड़ रुपये का इनाम था और 149 आपराधिक मामले दर्ज थे।
गिरिडीह जिले के पीरटांड़ थाना क्षेत्र के निवासी पतिराम मांझी पर 1987 से सक्रियता का लंबा इतिहास रहा। 2000 तक पीरटांड़, टुंडी और तोपचांद में उसका दबदबा था। उसके बाद जमुई (बिहार) स्थानांतरित होने पर एक बार गिरफ्तारी भी झेली। संगठन में रणनीतिकार के रूप में कुख्यात अनल दा ने 2022 से 2025 तक चाईबासा के आईईडी धमाकों को अंजाम दिया।
उसकी वारदातें रोंगटे खड़े कर देती हैं। नवंबर 2005 में गिरिडीह होमगार्ड संस्थान पर हमला कर 3 होमगार्ड और एक नागरिक की हत्या के साथ 183 राइफल लूट लीं। मार्च 2006 में बोकारो के सीआईएसएफ कैंप पर धावा बोलकर 5 जिला बल जवान शहीद हुए। जून 2018 कुचाई के ग्राग-कसरौली में मुठभेड़ से पुलिसकर्मी व कोबरा जवान की मौत हुई। मई 2019 में खरसावां के रेसुरु डैम पिकेट पर आईईडी से दो जवान घायल।
कुचाई के रायसिदरी अभियान में 15 कोबरा-जेजे जवान घायल। कुकडू हाट बाजार में 5 पुलिसकर्मियों की निर्मम हत्या। 2019 चुनावों में चैलेंजर बम हमले, 2020 रजियामा पिकेट पर ब्लास्ट, 2021 टोकलो लॉजी में 3 जेजे शहीद। मई 2025 में ओडिशा से 5 टन विस्फोटक लूट।
सीआरपीएफ आइजी साकेत कुमार सिंह व झारखंड पुलिस आइजी माइकल राज एस ने ऑपरेशन ‘मेगाबुरु’ की जानकारी साझा की। बाकी नक्सलियों से आत्मसमर्पण की अपील की गई है।