
झारखंड के 14 मजदूरों की दुबई में फंसी हालत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने राज्य सरकार से दो सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। ये मजदूर बोकारो, गिरिडीह और हजारीबाग के हैं, जो तीन माह पूर्व ईएमसी कंपनी के बहाने ट्रांसमिशन लाइन का काम करने दुबई गए थे।
मजदूरों का दावा है कि कंपनी ने उनकी मजदूरी रोकी, पासपोर्ट जब्त कर लिया और जबरन ओवरटाइम कराया। खाने-रहने की सुविधाएं भी न के बराबर हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के जरिए उन्होंने केंद्र व राज्य सरकार से गुहार लगाई, जिसके बाद मीडिया में मामला सुर्खियों में आ गया।
एनएचआरसी ने इसे गंभीर मानवाधिकार हनन का मामला मानते हुए मुख्य सचिव और स्टेट माइग्रेंट वर्कर्स कंट्रोल रूम प्रमुख को नोटिस जारी किया। आयोग का कहना है कि आरोप सत्य पाए जाने पर कड़े कदम उठाए जाएंगे।
एक मजदूर ने फोन पर बताया कि टिकट व रहने का खर्च वसूलने के नाम पर सैलरी से भारी कटौती की गई। अब हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि भूखे पेट रहना पड़ रहा है। सभी की मांग है सुरक्षित वापसी की।
खाड़ी देशों में भारतीय मजदूरों की दुर्दशा कोई नई बात नहीं। पासपोर्ट कब्जा, वेतन न देना जैसे मामले बार-बार सामने आते रहे हैं। झारखंड जैसे प्रवासी मजदूरों वाले राज्य में माइग्रेंट कंट्रोल रूम की भूमिका अब परखी जाएगी। यह केस अन्य मजदूरों के लिए मिसाल बन सकता है।