
रांची। झारखंड विधानसभा में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने 2026-27 के लिए 1,58,560 करोड़ रुपये का ‘अबुआ दिशोम बजट’ पेश कर एक नया अध्याय लिखा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में यह बजट गरीबी उन्मूलन, महिला सशक्तिकरण और बुनियादी ढांचे पर केंद्रित है।
पिछले वर्ष के 1,45,400 करोड़ से नौ प्रतिशत अधिक यह बजट राज्य के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने का संकल्प लेता है। वित्त मंत्री ने इसे गरीबों के आंसू पोंछने और सभी के चेहरे पर मुस्कान लाने वाला दस्तावेज बताया।
बजट पेश करते हुए केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। कर हिस्सा और अनुदान में 16,000 करोड़ की कमी, जीएसटी से 4,000 करोड़ वार्षिक नुकसान, मनरेगा से 5,640 करोड़ अतिरिक्त बोझ और कोयला कंपनियों का 1.36 लाख करोड़ बकाया बताते हुए नाराजगी जताई।
इन चुनौतियों के बावजूद कर्मचारी वेतन समय पर दिए गए और मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना पर 13,000 करोड़ खर्च हुए। राज्य राजस्व 2019-20 के 25,521 करोड़ से बढ़कर 66,700 करोड़ होने का अनुमान।
महिलाओं के लिए सबसे बड़ा प्रावधान: 18-50 वर्ष महिलाओं को 2,500 रुपये मासिक के लिए 14,065 करोड़। पेंशन पर 3,517 करोड़, स्वास्थ्य पर 7,990 करोड़ जिसमें कैंसर योजना और 750 अबुआ दवाखाना शामिल। महिला विकास विभाग को कुल 22,995 करोड़।
कृषि को बिरसा बीज योजना पर 145 करोड़, मिट्टी संरक्षण पर 475 करोड़, फसल बीमा पर 400 करोड़। ग्रामीण विकास के लिए 12,346 करोड़, अबुआ आवास पर 4,100 करोड़। शिक्षा पर 16,251 करोड़ प्राथमिक स्तर के लिए।
पूंजीगत व्यय 37,708 करोड़ (8.5% वृद्धि), राजकोषीय घाटा जीएसडीपी का 2.18%। यह बजट झारखंड की आत्मनिर्भरता की कहानी है।