
झारखंड हाईकोर्ट ने गुमला जिले से 2018 में लापता हुई छह वर्षीय बच्ची के मामले में राज्य सरकार और पुलिस की लापरवाही पर कड़ी चेतावनी दी है। बच्ची की मां चंद्रमुनि उराइन की हैबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस एके राय की खंडपीठ ने आठ साल बीतने के बावजूद सुराग न मिलने पर गृह सचिव को 27 जनवरी को ऑनलाइन हाजिर होने का आदेश दिया।
गुमला एसपी ने अदालत में बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए नई एसआईटी गठित की गई, जिसने दिल्ली में छापेमारी कर तस्वीरें बांटीं, लेकिन बच्ची का पता नहीं चला। कोर्ट ने घुमंतू समुदायों पर निगरानी की कमी पर सवाल उठाए, जो राजस्थान समेत अन्य राज्यों से आकर टेंट लगाते हैं बिना किसी पहचान जांच के।
हाल के गुलगुलिया गिरोह के अपहरण कांड का जिक्र करते हुए बेंच ने कहा कि बच्चों की तस्करी का नेटवर्क सक्रिय है। पुलिस आधार कार्ड या आईडी चेक नहीं करती, न ही सरकार ने दिशानिर्देश बनाए। अदालत ने ऐसी आपराधिक गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ठोस नीति बनाने का निर्देश दिया।
परिजनों की बार-बार शिकायतें नजरअंदाज होने से मामला कोर्ट पहुंचा। अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार ने सरकार का पक्ष रखा, लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया कि बच्चों के लापता मामलों को हल्के में नहीं लिया जाएगा। राज्य को प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।