
झारखंड सरकार ने राज्य बजट को आम जनता की भागीदारी से तैयार करने का अनूठा कदम उठाया है। एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल और मोबाइल एप की शुरुआत कर सरकार ने लोगों से सुझाव मांगे हैं। यह पहल बजट निर्माण प्रक्रिया को लोकतांत्रिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
बुधवार को लॉन्च हुए इस प्लेटफॉर्म पर शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, रोजगार और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में विस्तृत प्रस्ताव भेजे जा सकते हैं। अधिकारी बताते हैं कि सुझावों को गंभीरता से लिया जाएगा और संभवतः बजट में शामिल भी किया जाएगा।
पोर्टल सरल इंटरफेस के साथ विभिन्न श्रेणियों में बंटा है, जहां दस्तावेज अपलोड करने की सुविधा है। मोबाइल ऐप एंड्रॉयड व आईओएस पर उपलब्ध है, जिसमें ऑफलाइन मोड और बहुभाषी समर्थन है। ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए वॉयस इनपुट भी जोड़ा गया है।
वित्त मंत्री ने उद्घाटन समारोह में कहा, ‘बजट अब सिर्फ अफसरों का नहीं, जनता का दस्तावेज होगा।’ अगले 45 दिनों तक सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे। एक उच्च स्तरीय समिति इनकी समीक्षा करेगी।
झारखंड में बेरोजगारी, ग्रामीण संकट और सेवा विस्तार जैसी चुनौतियों के बीच यह कदम सराहनीय है। लॉन्च के कुछ घंटों में हजारों उपयोगकर्ता सक्रिय हो चुके हैं। विशेषज्ञ इसे केरल मॉडल से तुलनीय बता रहे हैं।
सरकार अपेक्षाकृत वंचित वर्गों से अधिक भागीदारी की अपील कर रही है। यदि सफल रहा तो यह अन्य राज्यों के लिए मिसाल बनेगा, जो डिजिटल युग में सहभागी शासन का प्रतीक है।