
गोवा में आयोजित क्यूएस इंडिया समिट 2026 के दौरान ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी (जेजीयू) ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए पांच देशों के दस प्रमुख विश्वविद्यालयों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। ये समझौते शैक्षणिक सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से हैं, जो छात्रों और शिक्षकों के लिए वैश्विक अवसरों के द्वार खोलेंगे।
इन एमओयू में कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया, साइमन फ्रेजर यूनिवर्सिटी, रॉयल रोड्स यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ गुएल्फ और ब्रॉक यूनिवर्सिटी शामिल हैं। वहीं न्यूजीलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ ओटागो, ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ शेफील्ड व यूनिवर्सिटी ऑफ स्टर्लिंग, मिस्र की डेल्टा यूनिवर्सिटी फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी तथा थाईलैंड की शिनावात्रा यूनिवर्सिटी भी साझेदार हैं।
समझौतों के दायरे में छात्र-शिक्षक आदान-प्रदान, संयुक्त शोध कार्य, अकादमिक कार्यक्रम और पार्टनर संस्थानों की प्राथमिकताओं के अनुरूप अन्य गतिविधियां होंगी। इससे जेजीयू का वैश्विक नेटवर्क अब 80 से अधिक देशों में 600 से ज्यादा साझेदारियों तक पहुंच गया है।
संस्थापक कुलपति प्रो. (डॉ.) सी. राज कुमार ने कहा कि वैश्विक दुनिया में ऐसी साझेदारियां अपरिहार्य हैं। ये न केवल शिक्षा व शोध के क्षितिज विस्तार करती हैं, बल्कि समाजोपयोगी ज्ञान सृजन भी करती हैं। ये एमओयू जेजीयू की वैश्विक प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हैं।
अकादमिक गवर्नेंस व स्टूडेंट लाइफ के डीन प्रो. पद्मनाभा रामानुजम ने जोर दिया कि सहयोग तभी सफल होता है जब परिणाममुखी हो। उन्होंने कहा कि ये एमओयू शोध, आदान-प्रदान व फैकल्टी सहयोग के लिए मजबूत आधार प्रदान करते हैं।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के वाइस डीन प्रो. (डॉ.) अखिल भारद्वाज ने बताया कि ये समझौते जेजीयू की वैश्विक रणनीति को सशक्त बनाएंगे। छात्रों के लिए विदेशी पढ़ाई, एक्सचेंज व संयुक्त कोर्स के नए रास्ते खुलेंगे।
समिट में भारत व विदेशी विश्वविद्यालयों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। उच्च शिक्षा के नवाचार, सहयोग व वैश्विक आवश्यकताओं पर गहन चर्चा हुई।