
लखनऊ में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक ने उत्तर प्रदेश और जापान के यामानाशी प्रांत के बीच पर्यटन एवं संस्कृति के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छूने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह की अध्यक्षता में हुई इस चर्चा में वेलनेस टूरिज्म, गोल्फ, व्यंजन आदान-प्रदान, बौद्ध सर्किट, साहित्यिक यात्राएं और ज्ञान आधारित पर्यटन पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।
मंत्री जयवीर सिंह ने भारत-जापान संबंधों की सांस्कृतिक मजबूती पर बल देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश का बौद्ध विरासत स्थल—सारनाथ, कुशीनगर, कपिलवस्तु—विश्व पटल पर अद्वितीय हैं। इन्हें केंद्र में रखकर पर्यटन आर्थिक साझेदारी को स्थायी रूप प्रदान किया जा सकता है। उन्होंने जापान में अप्रैल-मई 2025 में ‘यूपी फेस्टिवल’ आयोजित करने की योजना पर भी प्रकाश डाला, जो प्रदेश की सांस्कृतिक छटा को जापानी दर्शकों तक पहुंचाएगा।
पर्यटन विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने जापानी अवधारणाओं इकिगाई, वाबी-साबी, जेन और जाजेन का भारतीय दर्शन से साम्य बताते हुए वेलनेस और दार्शनिक पर्यटन पर सहयोग की वकालत की। आगरा, लखनऊ व वाराणसी के गोल्फ कोर्स का जिक्र करते हुए उन्होंने खेल पर्यटन की अपार संभावनाओं को रेखांकित किया। आधुनिक पर्यटन को क्यूरेटेड अनुभवों, भोजन यात्राओं और लर्निंग टूर्स की ओर मोड़ने का आह्वान किया।
यामानाशी के उप-राज्यपाल जुनिची इशिडेरा ने दिसंबर 2024 के एमओयू के बाद बढ़ते संवाद का उल्लेख किया। उन्होंने अपने प्रांत को यूपी का जापानी द्वार बताया और अगस्त 2025 में 200 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के दौरे की घोषणा की। यह साझेदारी पर्यटन को नई दिशा देगी तथा दोनों देशों के मध्य सांस्कृतिक पुल मजबूत करेगी।