
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा जिले में सरकारी फंड के गबन और अवैध नियुक्तियों के एक विशाल भ्रष्टाचार कांड ने खलबली मचा दी है। क्राइम ब्रांच के इकोनॉमिक ऑफेंस विंग ने इस मामले में 108 आरोपियों के खिलाफ मजबूत चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी है। इनमें 15 एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, 6 असिस्टेंट अकाउंट्स ऑफिसर, 1 अकाउंट्स असिस्टेंट, 6 हेड असिस्टेंट, 4 सीनियर असिस्टेंट समेत इलेक्ट्रिक डिवीजन सुंबल के कई कर्मचारी शामिल हैं।
मुख्य आरोपी मुश्ताक अहमद मलिक, जो अरागाम बांदीपोरा का निवासी है, इस पूरे रैकेट का किंगपिन माना जा रहा है। चार्जशीट में जम्मू-कश्मीर बैंक की सुंबल सोनावारी ब्रांच के 25 अधिकारियों-कर्मचारियों के अलावा 46 फर्जी कर्मचारियों के नाम भी दर्ज हैं, जिनकी नियुक्ति धोखे से की गई थी। जांच एजेंसी ने बताया कि ड्राइंग एंड डिसबर्सिंग ऑफिसर ने अन्य अधिकारियों व बैंक स्टाफ के साथ मिलकर सरकारी खातों से करोड़ों रुपये की हेराफेरी की और फर्जी भर्तियों को अंजाम दिया।
जांच के दौरान मुख्य आरोपी मलिक के पास से करोड़ों रुपये बरामद हुए, जिन्हें सरकारी खजाने में जमा कराया गया। उसके विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर हुई मोटी रकम, बचत खाते, फिक्स्ड डिपॉजिट और ब्याज की जानकारी भी सामने आई है। क्राइम ब्रांच अब अन्य संलिप्त अधिकारियों की तलाश में जुटी हुई है। यह भ्रष्टाचार का मामला विश्वसनीय सूचना पर दर्ज किया गया था, जिसमें सरकारी फंड का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग उजागर हुआ।
सरकार ने सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी प्रदान कर दी है। चार्जशीट स्पेशल जज, एंटी-करप्शन कोर्ट, बारामूला में पेश की गई है, जहां अब न्यायिक प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ेगी। यह मामला जम्मू-कश्मीर में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई का उदाहरण बन गया है।