
मणिपुर में राजनीतिक भूचाल आ गया है। कूकी-जो समुदाय के प्रतिनिधि संगठन इंटीग्रेटेड ट्राइबल लेबर यूनियन (आईटीएलएफ) ने साफ लफ्जों में कहा है कि कूकी-जो विधायक राज्य सरकार के गठन में किसी भी रूप में हिस्सा नहीं लेंगे। यह घोषणा जातीय हिंसा की आग में झुलस रही मणिपुर की सियासत को नई दिशा देगी।
आईटीएलएफ ने बयान जारी कर कहा, ‘कोई भी कूकी-जो विधायक बीरेन सिंह सरकार में शामिल नहीं होंगे और न ही बाहर से समर्थन देंगे।’ संगठन ने राज्य सरकार पर कबीलाई समुदायों के खिलाफ हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है। मई 2023 से अब तक 200 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, हजारों विस्थापित हुए हैं।
मणिपुर विधानसभा में कूकी बहुल 10 सीटें हैं। इन विधायकों के बहिष्कार से भाजपा गठबंधन की सरकार कमजोर पड़ सकती है। मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह पर पक्षपातपूर्ण रवैये के आरोप लग रहे हैं। मीती समुदाय और कूकी जनजातियों के बीच जमीन, आरक्षण और सुरक्षा को लेकर तनातनी चरम पर है।
संगठन ने स्वायत्त काउंसिल और केंद्रीय बलों की निष्पक्ष तैनाती की मांग की है। दिल्ली से कई प्रयास हुए, लेकिन जमीन पर शांति दूर की कौड़ी बनी हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम राज्य में राष्ट्रपति शासन की मांग को बल देगा।
मणिपुर के लोग हिंसा के चक्रव्यूह में फंसे हैं। आईटीएलएफ का यह रुख जातीय सुलह की राह में बड़ा रोड़ा है। आने वाले दिनों में केंद्र को हस्तक्षेप बढ़ाना पड़ सकता है।