
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को पीएसएलवी-सी62 मिशन के दौरान बड़ा झटका लगा है। मिशन के तीसरे चरण में तकनीकी गड़बड़ी आने से मुख्य उपग्रह अपनी कक्षित में नहीं पहुंच सका। इसरो चेयरमैन एस सोमनाथ ने घटना की गहन जांच शुरू करने की घोषणा की है।
श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित यह रॉकेट पहले दो चरणों में बिल्कुल सामान्य रहा। लेकिन तीसरे चरण के इग्निशन के तुरंत बाद टेलीमेट्री डेटा में अनियमितताएं दिखाई दीं। चेयरमैन ने बताया कि लिक्विड इंजन में समस्या की आशंका है।
हालांकि, सहायक पेलोड सफलतापूर्वक निचली कक्षा में स्थापित हो गए। इसरो के इंजीनियरों की टीम फ्लाइट डेटा का विश्लेषण कर रही है। संभावित कारणों में प्रोपेलेंट फ्लो या स्ट्रक्चरल इंटीग्रिटी शामिल हो सकते हैं।
पीएसएलवी सीरीज की सफलता दर 95 प्रतिशत से अधिक है, इसलिए यह दुर्लभ घटना है। सोमनाथ ने कहा कि ऐसी विफलताएं भविष्य के मिशनों को मजबूत बनाती हैं। जांच रिपोर्ट जल्द जारी होगी।
इसरो का लॉन्च शेड्यूल अप्रभावित है। गगनयान और अन्य महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर काम जारी रहेगा। यह घटना अंतरिक्ष तकनीक की चुनौतियों को रेखांकित करती है।