
मिडिल ईस्ट में इजरायल-अमेरिका-ईरान युद्ध की आग अब भारत की ऊर्जा जरूरतों को भस्म करने के कगार पर पहुंच गई है। सरकारी कंपनी गेल (इंडिया) लिमिटेड ने खुलासा किया है कि कतर से आने वाली तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति पूरी तरह थम चुकी है। होर्मुज की खाड़ी में समुद्री रुकावटों के कारण जहाज रुके हुए हैं और कतर का दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी प्लांट रास लाफान बंद हो गया है।
कंपनी की एक्सचेंज फाइलिंग में बताया गया कि लॉन्ग टर्म सप्लायर पेट्रोनेट एलएनजी ने 3 मार्च को फोर्स मेजर घोषित किया। कतरएनर्जी ने भी सैन्य टकराव के चलते संभावित फोर्स मेजर की सूचना दी, जिससे गेल का कोटा 4 मार्च 2026 से शून्य हो गया। अगर हालात यूं ही बने रहे तो डाउनस्ट्रीम ग्राहकों को गैस कटौती का सामना करना पड़ सकता है।
गेल देश के 11,400 किलोमीटर लंबे गैस पाइपलाइन नेटवर्क का संचालन करती है, जो बाजार में 75 फीसदी हिस्सेदारी रखता है। यह नेटवर्क उद्योगों से लेकर घरेलू उपभोक्ताओं तक गैस पहुंचाता है। अन्य स्रोतों से सप्लाई अभी ठीक है, लेकिन कतर पर निर्भरता चिंता का विषय बनी हुई है।
वैश्विक बाजार में हड़कंप मचा है। एशिया में स्पॉट एलएनजी कीमतें 23.80 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू तक गिरकर स्थिर हुईं, जो फिर भी पिछले हफ्ते से दोगुनी हैं। अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमले के जवाब में ईरान के मिसाइल-ड्रोन अटैक ने तेल-गैस सप्लाई पर सवाल खड़े कर दिए।
होर्मुज जलडमरूमध्य, जो फारस की खाड़ी को दुनिया से जोड़ता है, सबसे संवेदनशील बिंदु है। कुछ टैंकर यूरोप की जगह एशिया की ओर मुड़ गए हैं, जिससे सप्लाई की होड़ तेज हो गई। विशेषज्ञ चेताते हैं कि लंबे संघर्ष से वैश्विक ऊर्जा बाजार लड़खड़ा सकता है और भारत जैसे आयातक देशों को भारी नुकसान होगा।
गेल हालात की निगरानी कर रही है और शेयर बाजार को अपडेट देती रहेगी। यह संकट भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा सवालिया निशान लगा रहा है।