
दुनिया तेजी से बदल रही है, लेकिन अमीर-गरीब की खाई बढ़ रही है जो परिवारों और बच्चों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रही है। संयुक्त राष्ट्र ने 2026 के अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस के लिए ‘परिवार, असमानताएं और बाल कल्याण’ विषय चुना है, जो शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल पहुंच की असमानताओं को पाटने पर केंद्रित है।
कई परिवार आय की अनिश्चितता, बच्चों की देखभाल की कमी और सेवाओं से वंचन से जूझ रहे हैं। छोटे बच्चों वाले घरों में गरीबी का खतरा अधिक है, जो उनके शारीरिक विकास, पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। प्रारंभिक पोषण और सुरक्षित वातावरण न मिलने से भविष्य खतरे में पड़ जाता है।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, असमानता आर्थिक ही नहीं, शिक्षा, चिकित्सा, डिजिटल संसाधनों तक सीमित है। लिंग, जाति, विस्थापन या अक्षमता जैसी बाधाएं इसे और गहरा देती हैं। इसलिए परिवार-केंद्रित नीतियों पर निवेश जरूरी है।
सरकारों को बाल सहायता राशि, माता-पिता को अवकाश, सस्ता चाइल्डकेयर और प्रारंभिक शिक्षा जैसी योजनाओं को मजबूत करना चाहिए। इससे परिवार सशक्त होंगे और समाज संतुलित बनेगा।
इस दिवस की शुरुआत 1980 के दशक में हुई जब संयुक्त राष्ट्र ने परिवारों की भूमिका पर ध्यान दिया। 1983 में सामाजिक विकास आयोग ने जागरूकता की वकालत की। 1989 में महासभा ने 1994 को परिवार वर्ष घोषित किया और 1993 में 15 मई को स्थायी दिवस बनाया।
2015 के सतत विकास लक्ष्य परिवारों को केंद्र में रखते हैं। मजबूत परिवार ही स्वस्थ समाज की कुंजी हैं।
