
विशाखापत्तनम में 2026 का इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (आईएफआर) और मिलन आयोजन भारतीय नौसेना का भव्य कार्यक्रम होगा। पाकिस्तान और चीन को आमंत्रित न करने से पहले ही विवादास्पद, लेकिन स्थान ही पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा आघात साबित होगा। यहीं 1971 युद्ध में पाक की पनडुब्बी पीएनएस गाजी को भारतीय नौसेना ने समुद्र की गोद में सुला दिया था।
विक्रांत विमानवाहक को निशाना बनाने आई गाजी को आईएनएस राजपूत ने चालाकी से डुबो दिया। मलबे की खोज में तत्कालीन आईएनएस निस्तार ने अहम भूमिका निभाई। 55 वर्ष बाद उसी स्थान पर नया स्वदेशी आईएनएस निस्तार आईएफआर में शामिल हो रहा है। नौसेना के अनुसार, यह डाइविंग सपोर्ट वेसल गाजी के अवशेषों के ऊपर तैनात रहेगा।
18 जुलाई 2025 को कमीशन किया गया यह जहाज पूरी तरह भारतीय है। लंबे समय से नौसेना में डाइविंग सपोर्ट वेसल की कमी थी, जिसे पूरा करने हेतु निस्तार और निपुण बनाए गए। हिंदुस्तान शिपयार्ड ने 2018 के अनुबंध के तहत इन्हें तैयार किया, कोविड से मामूली विलंब हुआ।
120 मीटर लंबा, 10,000 टन वजनी यह जहाज 18 नॉटिकल मील की गति से दौड़ता है। आधुनिक डाइविंग उपकरणों से सुसज्जित, यह डीएसआरवी को गहरे समुद्र में उतारकर पनडुब्बी आपातकाल में नौसैनिकों को बचाएगा। ‘निस्तार’ संस्कृत का शब्द है, अर्थात मुक्ति। दुनिया के चुनिंदा देशों के पास ही ऐसी क्षमता है।
स्वदेशी विक्रांत के साथ निस्तार का यह संयोग ऐतिहासिक विजय को पुनर्जीवित करता है। आईएफआर वैश्विक नौसेनाओं का मेला होगा, लेकिन भारत के लिए यह शक्ति प्रदर्शन का प्रतीक बनेगा।