
नई दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पीके मिश्र ने भारत के सतत ऊर्जा संक्रमण को विकासशील देशों के लिए प्रेरणादायी मॉडल बताया। आईआरएडीई के इस आयोजन में उन्होंने स्वच्छ ऊर्जा को विकसित भारत का अभिन्न अंग करार दिया, जो आर्थिक प्रगति, सामाजिक न्याय और ऊर्जा सुरक्षा का आधार बनेगा।
पीएम मोदी के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि स्वच्छ शक्ति, हरा विकास और टिकाऊ जीवन ही विकसित भारत की नींव हैं। भारत के अनुभव से दो मुख्य सीखें सामने आईं। पहली, बड़े लक्ष्य तभी सफल होते हैं जब संस्थाएं मजबूत हों, वित्तीय सहायता अटल हो और क्रियान्वयन निर्बाध। 100 गीगावाट सौर ऊर्जा का समय से पूर्व लक्ष्य हासिल होना इसका जीवंत प्रमाण है।
दूसरी, परिवर्तन तब टिकाऊ होता है जब जनता को सीधा लाभ मिले। पीएम-कुसुम से किसानों को सौर ऊर्जा से राहत, पीएम सूर्य घर योजना से घरों को मुफ्त बिजली और सौर निर्माण व इलेक्ट्रिक वाहनों से रोजगार के नए द्वार खुले। इससे डीकार्बनाइजेशन विकास को गति देता नजर आता है।
ग्लोबल साउथ के संदर्भ में मिश्र ने न्यायपूर्ण, समावेशी और विकासकारी संक्रमण पर बल दिया, जिसमें साझा जिम्मेदारियां, राष्ट्रीय स्थितियां और वैश्विक साझेदारी को महत्व मिले। भारत ने 2005-2020 में जीडीपी उत्सर्जन तीव्रता 36% घटाई और पेरिस लक्ष्यों को नौ वर्ष पहले पूरा किया।
ऊर्जा विविधीकरण की बात की तो राष्ट्रीय सौर मिशन का विस्तार, जैव ईंधन नीतियां, हाइड्रोजन मिशन और निजी परमाणु ऊर्जा उद्घाटन उल्लेखनीय हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पीएम-कुसुम मजबूत कर रहा है। स्वच्छ ऊर्जा परिवारों तक लाभ पहुंचा रही, 100% विद्युतीकरण और उजाला योजना इसका उदाहरण।
आईएसए के जरिए 112 देशों का नेतृत्व, पंचामृत प्रतिज्ञाएं और लाइफ मूवमेंट ने भारत को जलवायु नेतृत्व प्रदान किया। जलवायु वित्त और तकनीक हस्तांतरण की मांग की। कोयले की अस्थायी भूमिका बनी रहेगी। भारत का मॉडल विकास-पर्यावरण संतुलन का प्रतीक है।