
नई दिल्ली। भारत की सौर ऊर्जा यात्रा ने एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल कर लिया है। केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने घोषणा की कि देश की स्थापित सौर क्षमता अब 136 गीगावाट तक पहुंच चुकी है, जो कुल नवीकरणीय ऊर्जा का लगभग आधा हिस्सा है। यह उपलब्धि नीतिगत दृढ़ता और नवाचार की शक्ति का जीता-जागता प्रमाण है।
अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) के फाउंडेशन डे पर बोलते हुए जोशी ने वैश्विक सौर क्रांति की गति और आईएसए की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह गठबंधन साझा संकल्प और वैश्विक साझेदारी की मिसाल है, जो सौर ऊर्जा के जरिए सतत विकास को गति दे रहा है।
पिछले दस वर्षों में आईएसए ने सौर ऊर्जा के सपनों को वास्तविकता में बदल दिया है। विकासशील देशों में ऊर्जा संक्रमण को तेज किया और जरूरतमंद समुदायों तक स्वच्छ बिजली पहुंचाई। एक दृढ़ दृष्टि से शुरू होकर आज यह 120 से अधिक देशों का विशाल समूह बन चुका है।
मंत्री ने प्रमुख योजनाओं का जिक्र किया। पीएम सूर्यघर योजना से लाखों घर स्वयं सौर बिजली पैदा कर रहे हैं, जबकि पीएम-कुसुम से किसानों को सौर सिंचाई से लाभ मिल रहा है। ये प्रयास आमजन तक सौर लाभ पहुंचा रहे हैं।
वैश्विक स्तर पर पहली 1000 गीगावाट सौर क्षमता में 25 वर्ष लगे, लेकिन अगली 1000 गीगावाट जल्द स्थापित होगी। जोशी ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा का केंद्र वैश्विक दक्षिण की ओर खिसक रहा है, जहां सूर्य की प्रचुरता अवसर दे रही है।
आईएसए सरकारों, वित्तीय संस्थानों और निजी क्षेत्र को जोड़कर सौर विस्तार को प्रोत्साहित कर रहा है। महानिदेशक आशीष खन्ना ने सदस्य देशों, 77 साझेदार संगठनों और आईआईटी दिल्ली के युवा सौर विशेषज्ञों को धन्यवाद दिया।
2015 में पीएम मोदी और फ्रांस द्वारा सीओपी-21 में स्थापित आईएसए सतत ऊर्जा की दिशा में भारत का नेतृत्व दर्शाता है।