
वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम के तहत भारत भर में गंगा नदी डॉल्फिन की दूसरी राष्ट्रीय गिनती शुरू हो गई है। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से इस अभियान की शुरुआत हुई, जहां गंगा के किनारों पर विशेषज्ञ टीमों ने गिनती आरंभ की।
वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई) और राज्य वन विभागों के सहयोग से आयोजित यह जनगणना गंगा, ब्रह्मपुत्र और उनकी सहायक नदियों के प्रमुख खंडों पर केंद्रित है। डॉल्फिनों को ‘नदी का मुस्कान’ कहा जाता है, जो पारिस्थितिकी तंत्र की सेहत का सूचक हैं।
प्रदूषण, बांधों का निर्माण और अवैध मछली पकड़ने से इनका अस्तित्व खतरे में है। पिछली गिनती में संख्या में मामूली वृद्धि दर्ज की गई थी, लेकिन विस्तृत आंकड़ों की आवश्यकता बनी हुई है। इस बार हाइड्रोफोन और ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग हो रहा है।
बिजनौर में स्थानीय समुदायों को प्रशिक्षित किया गया है। जागरूकता अभियान इनकी सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित कर रहे हैं। राष्ट्रीय डॉल्फिन संरक्षण योजना के लिए ये आंकड़े आधारभूत होंगे।
अगले कुछ सप्ताहों में विभिन्न राज्यों से अपडेट आएंगे। संरक्षणविद् अवैध शिकार रोकने और नदी सफाई पर जोर दे रहे हैं। वर्षांत तक परिणाम आने से नीतियां मजबूत होंगी, जिससे ये नदीय रत्न सुरक्षित रह सकें।