
नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर भारत की लोकतांत्रिक यात्रा की यादें ताजा हो रही हैं। 1947 में आजादी मिली, लेकिन ब्रिटिश कानून बने रहे। अपनी सरकार थी, पर अपना संविधान नहीं। इस कमी को दूर करने संविधान सभा 9 दिसंबर 1946 को बनी।
तीन साल बाद 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ। यह तारीख 1930 के पूर्ण स्वराज दिवस को याद दिलाती है, जब पूरे देश में पहली बार स्वतंत्रता का उत्सव मनाया गया।
1929 में प्रस्ताव पारित होने से स्वराज लक्ष्य बिंदु बना। सभा की पहली बैठक संसद भवन में हुई, डॉ. राजेंद्र प्रसाद अध्यक्ष बने, बाबासाहेब अंबेडकर ड्राफ्टिंग कमेटी के प्रमुख।
गांधी-नेहरू ने अंबेडकर को चुना ताकि संविधान पर कोई सवाल न उठे। दो साल 11 माह 17 दिन की बहस के बाद 26 नवंबर 1949 को अपनाया गया। 11 सत्रों में 165 दिन, 114 दिन मसौदे पर चर्चा।
इससे भारत संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य बना। 1976 में समाजवादी-धर्मनिरपेक्ष शब्द जुड़े। गणतंत्र दिवस पर देशभर ध्वजारोहण, परेड। दिल्ली के कर्तव्य पथ पर भव्य आयोजन: पीएम शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि।
राष्ट्रपति के आगमन से ध्वज फहराव, राष्ट्रगान, 21 तोपें। सेना-नौसेना-वायुसेना की टुकड़ियां, मिसाइलें, सांस्कृतिक झांकियां—देश की एकता का प्रतीक।