
नई दिल्ली। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने सोमवार को स्पष्ट किया कि भारत के ऊर्जा स्रोत चयन के सभी फैसले राष्ट्रीय हितों के अनुरूप होते हैं, जिसमें स्रोतों का विविधीकरण और प्रतिस्पर्धी दरें प्रमुख हैं। यह बयान अमेरिका के साथ अस्थायी व्यापार समझौते के बाद रूसी तेल आयात कम करने की अफवाहों के संदर्भ में आया।
रूसी कच्चे तेल पर सवालों का जवाब देते हुए मिस्री ने कहा कि विकासशील अर्थव्यवस्था होने के नाते स्थिर व किफायती ऊर्जा सुनिश्चित करना भारत के लिए जरूरी है। भारतीय उपभोक्ताओं की रक्षा सरकार की पहली प्राथमिकता है।
देश अपनी 80-85 प्रतिशत ऊर्जा जरूरतें आयात करता है, जो महंगाई पर असर डाल सकती हैं। सरकार का उद्देश्य उपभोक्ताओं को सस्ते दाम पर पर्याप्त व विश्वसनीय ऊर्जा उपलब्ध कराना है।
वैश्विक बाजारों की अनिश्चितताओं के बीच भारत स्थिरता का कारक बन रहा है। मिस्री ने कहा कि नीति के आधार हैं- पर्याप्तता, उचित मूल्य व विश्वसनीयता। आयात फैसले सार्वजनिक-निजी तेल कंपनियां बाजार के अनुसार लेती हैं।
‘सरकार व कारोबारी संस्थान सभी निर्णय राष्ट्रीय हितों से निर्देशित रखते हैं,’ मिस्री ने जोर दिया।
उधर, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राज्यसभा में बताया कि रणनीतिक भंडार 74 दिनों की जरूरतें पूरी कर सकते हैं। आईएसपीआरएल के पास 40.94 लाख मीट्रिक टन तेल है, जो 77 प्रतिशत क्षमता है।
भारत तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता व चौथा रिफाइनर है। रिफाइनिंग क्षमता 260 से बढ़कर 320 मिलियन मीट्रिक टन सालाना हो गई, जो ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करती है।
