
ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले में मौत के बाद भारत भर से राजनीतिक हलकों में गहरी रोष की लहर दौड़ गई। रविवार को विभिन्न दलों के प्रमुख नेताओं ने इस कायराना हमले की कड़ी निंदा की और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव पर चिंता प्रकट करते हुए शांति की अपील की।
भाजपा तेलंगाना अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रवक्ता मीर फिरासत अली बाकरी ने ईरानी सांस्कृतिक केंद्र में श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा, ‘अमेरिका और इजरायल द्वारा खामेनेई पर किया गया यह नीच हमला अत्यंत निंदनीय है। यह केवल मुस्लिम समुदाय ही नहीं, पूरे भारत के लिए अपूरणीय क्षति है। इसकी भर्ती असंभव है।’
आप दिल्ली के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने वैश्विक संस्थाओं की विफलता को जिम्मेदार ठहराया। ‘जब संयुक्त राष्ट्र, विश्व व्यापार संगठन और सुरक्षा परिषद असफल हो जाते हैं, तो विवादों का समाधान युद्ध से ही होता है। पिछले वर्षों में दक्षिणपंथी शक्तियों के सत्ता में आने से ये संस्थाएं कमजोर हुई हैं।’
कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने कहा, ‘द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इतना बड़ा संघर्ष नहीं देखा। देशों को एक-दूसरे के नेताओं को निशाना बनाने से रोका जाना चाहिए, वरना मानवता खतरे में पड़ जाएगी।’
यह घटना ईरान के 46 वर्षीय शिया शासन में बड़ा परिवर्तन ला सकती है। तेहरान की प्रतिक्रिया से पहले ही क्षेत्र में नई दुश्मनी भड़क चुकी है। विश्व नेता कूटनीतिक प्रयासों से स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं।