
राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में 25 फरवरी को भारतीय थलसेना ने ‘अग्नि वर्षा’ अभ्यास के जरिए अपनी सैन्य शक्ति का ऐसा प्रदर्शन किया कि थार मरुस्थल गूंज उठा। दक्षिणी कमान द्वारा आयोजित इस युद्धाभ्यास में टी-90 टैंक, के-9 वज्र तोपें, शरंग तोप प्रणाली, बोफोर्स तोपखाने, रॉकेट लॉन्चर, पैदल सेना वाहन, स्वदेशी एएलएच ध्रुव हेलीकॉप्टर, एएच-64 अपाचे और ड्रोन इकाइयों ने एक साथ मिलकर दुश्मन ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया।
वास्तविक युद्ध की नकल करते हुए यह अभ्यास विभिन्न हथियारों के समन्वित उपयोग पर केंद्रित रहा। लंबी दूरी पर सटीक गोले दागे गए, सैनिकों और संसाधनों की तेजी से तैनाती हुई तथा बहुआयामी हमलों में ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम का बेहतरीन इस्तेमाल दिखा। रेगिस्तान की कठोर चुनौतियों के बावजूद सेना ने गति, सटीकता और तालमेल का परिचय दिया।
25 देशों के विदेशी रक्षा पत्रकारों ने इस अभ्यास को नजदीक से देखा और भारतीय सेना की क्षमताओं की तारीफ की। ‘अग्नि वर्षा’ तकनीकी उन्नयन, स्वदेशीकरण और युद्धक तैयारी के सेना के निरंतर प्रयासों को रेखांकित करता है। यह केवल अभ्यास नहीं, बल्कि राष्ट्र की रणनीतिक ताकत और दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रतीक है।