
नई दिल्ली में शुक्रवार को एक ऐतिहासिक सैन्य आयोजन की शुरुआत हुई जब 10वें सेना प्रमुखों का सम्मेलन प्रारंभ हुआ। यह दो दिवसीय महत्वपूर्ण गोष्ठी 27 से 28 फरवरी तक चलेगी। विशेष रूप से नेपाल के पूर्व सेना प्रमुख की उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी खास बना दिया है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह भागीदारी वैश्विक पटल पर अद्वितीय है और भारत-नेपाल के गहरे सैन्य संबंधों को प्रतिबिंबित करती है। आपसी विश्वास, साझा मूल्य और समान सैन्य विरासत पर टिकी यह परंपरा भारत के ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति और सभ्यतागत मूल्यों का प्रतीक है।
विशेषज्ञों का मत है कि यह मंच वर्तमान और पूर्व नेतृत्व के बीच पेशेवर संवाद का मजबूत माध्यम है। यह पीढ़ीगत निरंतरता सुनिश्चित करता है और सामूहिक अनुभव को समृद्ध बनाता है। राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पार्पण से शुरू हुआ यह सम्मेलन परिचालन तैयारी, क्षमता उन्नयन और सुरक्षा चुनौतियों पर केंद्रित चर्चाओं में बदल गया।
पूर्व प्रमुख अन्य कार्यक्रमों में भाग लेंगे, जिसमें चयनित सैन्य ठिकानों और सांस्कृतिक स्थलों का भ्रमण शामिल है। यह सम्मेलन भारतीय सेना की संस्थागत स्मृति को मजबूत करने और चिरकालिक एकजुटता को पोषित करने की दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रमाण है।