
नई दिल्ली में आर्थिक आंकड़ों के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाने की तैयारी है। सरकार ने मुख्य आर्थिक संकेतकों की प्रासंगिकता, सटीकता और वैश्विक तुलनात्मकता बढ़ाने के लिए विस्तृत समीक्षा पूरी कर ली है। इसके परिणामस्वरूप जीडीपी, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) की नई श्रृंखलाएं नए आधार वर्षों के साथ जारी की जाएंगी।
राज्यसभा में राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने सोमवार को बताया कि जीडीपी के नए आंकड़े 27 फरवरी को, सीपीआई 12 फरवरी को और आईआईपी 28 मई को प्रकाशित होंगे। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (मोस्पी) ने विशेषज्ञ तकनीकी समितियों की निगरानी में इस पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया है।
इन समितियों में विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर, केंद्र-राज्य अधिकारी, आरबीआई और अन्य विशेषज्ञ शामिल रहे। इसमें गणना पद्धतियों में सुधार, नए स्रोतों का समावेश और भारांकन अद्यतन किया गया है, विशेषकर सेवा क्षेत्र तथा अनौपचारिक अर्थव्यवस्था को बेहतर प्रतिबिंबित करने के लिए।
सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के एसडीडीएस मानकों का पालन सुनिश्चित किया है, जिसमें डेटा की उपलब्धता, समयबद्धता, पहुंच और गुणवत्ता प्रमुख हैं। हालिया सुधारों से आंकड़े अधिक विश्वसनीय और समसामयिक हो गए हैं।
नए आधार वर्ष—जीडीपी व आईआईपी के लिए 2022-23 तथा सीपीआई के लिए 2024—अर्थव्यवस्था के वर्तमान स्वरूप को सटीक ढंग से दर्शाएंगे। ग्रामीण-शहरी उपभोग को बेहतर मापने में मदद मिलेगी। सभी श्रृंखलाओं का एक साथ क्रियान्वयन पारदर्शिता और सहयोग को रेखांकित करता है।
ये कदम नीति निर्माण, योजना कार्यान्वयन और जन जागरूकता में सहायक सिद्ध होंगे। तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था में भारत के आंकड़े हमेशा उपयोगी बने रहेंगे।