
सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में भारत ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। देश ने राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानकों (एनक्यूएएस) के तहत 50,000 प्रमाणपत्रों का आंकड़ा पार कर लिया है। यह मील का पत्थर देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित एनक्यूएएस कार्यक्रम स्वास्थ्य केंद्रों की गुणवत्ता का सख्त मूल्यांकन करता है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पतालों तक, 50,000 से अधिक संस्थानों को अब यह प्रतिष्ठित प्रमाणन प्राप्त हो चुका है।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने इसे राज्यों, स्वास्थ्यकर्मियों और केंद्र सरकार के संयुक्त प्रयासों का परिणाम बताया। आयुष्मान भारत योजना के तहत गुणवत्ता सुधार पर जोर दिया जा रहा है।
2017 में शुरू हुए इस कार्यक्रम में बुनियादी ढांचा, चिकित्सा सेवाएं, मरीज सुरक्षा और संक्रमण नियंत्रण जैसे क्षेत्र शामिल हैं। सुधारात्मक कदमों के बाद ही प्रमाणन प्रदान किया जाता है। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्य इस दौड़ में अग्रणी हैं।
महामारी के बाद बढ़ती स्वास्थ्य मांगों के बीच यह उपलब्धि महत्वपूर्ण है। प्रमाणित केंद्रों में मरीज संतुष्टि बढ़ी है और मृत्यु दर घटी है। 2025 तक 75,000 प्रमाणपत्रों का लक्ष्य है।
कमी वाले क्षेत्रों में गुणवत्ता बनाए रखना चुनौती है, लेकिन 500 करोड़ रुपये के बजट से इरादा साफ है। 2030 के स्वास्थ्य लक्ष्यों की ओर बढ़ते हुए, 50,000 एनक्यूएएस एक प्रेरणा स्रोत हैं।