
प्रख्यात वक्ता हरविंदर कल्याण ने जोरदार अंदाज में कहा कि लंबे औपनिवेशिक शासन की जंजीरों के बावजूद भारत विश्व का सबसे विशाल लोकतंत्र बना हुआ है। यह बयान देश की लोकतांत्रिक मजबूती को रेखांकित करता है।
ब्रिटिश राज ने करीब दो सौ वर्षों तक भारत को लूटा और दबाया, लेकिन 1947 में आजादी के बाद संविधान निर्माताओं ने एक ऐसा ढांचा खड़ा किया जिसमें हर नागरिक की आवाज महत्वपूर्ण हो। कल्याण ने अपने संबोधन में कहा, ‘औपनिवेशिक अत्याचारों ने हमारी आकांक्षाओं को कुचलने की कोशिश की, लेकिन आज भारत लोकतंत्र का प्रतीक है।’
दुनिया के सबसे बड़े मतदाता वर्ग के साथ भारत में हर पांच साल में होनेवाले आम चुनाव, स्वतंत्र न्यायपालिका और प्रेस की आजादी ने इसे मजबूत बनाया है। विविधता से भरे देश में संघीय व्यवस्था ने क्षेत्रीय आकांक्षाओं को स्थान दिया।
कल्याण ने चुनौतियों जैसे गरीबी, भ्रष्टाचार और राजनीतिक विभाजन का जिक्र करते हुए कहा कि ये किसी भी उभरते लोकतंत्र की सामान्य बाधाएं हैं। भारत ने इन्हें पार कर वैश्विक पटल पर अपनी जगह बनाई है।
भविष्य की चुनौतियों के बीच कल्याण का यह संदेश प्रेरणादायक है। भारत का लोकतांत्रिक सफर न केवल देशवासियों बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा स्रोत है, जो साबित करता है कि दमन लंबे समय तक नहीं टिक सकता।