
नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन पर श्रद्धांजलि देने में कथित पांच दिन के विलंब के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बिना तथ्यों की जांच किए टिप्पणियां करने से लोगों को रोका।
जायसवाल ने स्पष्ट किया कि विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 5 मार्च को, जब शोक-पुस्तिका खुली ही थी, ईरानी दूतावास जाकर हस्ताक्षर किए। उन्होंने भारत सरकार की ओर से संवेदनाएं व्यक्त कीं और राजदूत मोहम्मद फथाली से भेंट भी की। ‘यह औपचारिकता पहले दिन ही पूरी हो गई थी। लोगों को तथ्य जुटाने चाहिए, बिना जानकारी के बयानबाजी न करें।’
दूतावास ने सभी वर्गों से शोक व्यक्त करने का आह्वान किया था। 5, 6 और 9 मार्च को राजनेता, अधिकारी, धार्मिक नेता, विद्वान, शिक्षक और पत्रकार पहुंचे। 11 मार्च को दूतावास ने भारत का धन्यवाद दिया।
86 वर्षीय खामेनेई की 28 फरवरी को इजरायल-अमेरिका के हमले में मौत हुई, जिसमें रक्षा मंत्री, आईआरजीसी प्रमुख समेत कई हताहत हुए। उनके परिवार के सदस्य—बहू, बेटी, नाती—भी मारे गए, पत्नी ने इलाज के दौरान दम तोड़ा।
यह कदम भारत-ईरान संबंधों को मजबूत करता है और गलत सूचनाओं के खिलाफ सतर्कता सिखाता है।