
गुजरात की औद्योगिक नगरी वापी में भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) को लेकर व्यापारियों में खासा उत्साह छाया हुआ है। अमेरिकी टैरिफ से जूझ रहे स्थानीय उद्योगों के लिए यह समझौता वरदान साबित हो सकता है।
वापी और आसपास के इलाकों में छोटे-बड़े करीब दस हजार से ज्यादा उद्योग संचालित हैं। यहां केमिकल, फार्मा, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग व पेपर जैसे क्षेत्र प्रमुख हैं। ट्रंपकालीन टैरिफ के कारण निर्यात प्रभावित होने से उद्योगपतियों को नुकसान उठाना पड़ा था। अब ईयू के साथ डील से नए बाजार खुलने की उम्मीद है।
मंगलम ड्रग्स के डायरेक्टर डॉ. कमल वसी ने कहा कि फार्मा क्षेत्र के लिए यूरोप का बाजार अब बिना टैरिफ के उपलब्ध हो गया है। ‘अमेरिकी बाधाओं से परेशान हमारा सेक्टर अब तेजी से बढ़ेगा। भारत की जेनेरिक दवाओं को ईयू में आसानी से जगह मिलेगी।’
प्रमुख उद्योगपति शरद ठाकर ने इसे ऐतिहासिक करार दिया। ‘पीएम मोदी के नेतृत्व में यह सबसे फायदेमंद सौदा है, जो अमेरिकी नुकसान की भरपाई करेगा।’
वापी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश पटेल ने इसे ‘सभी डीलों की मां’ बताया। फार्मा से पेस्टीसाइड्स तक सभी क्षेत्र लाभान्वित होंगे। ‘यह वापी के लिए मील का पत्थर बनेगा और विकसित भारत के सपने को साकार करेगा।’
एफटीए से आयात-निर्यात दोनों सुगम होंगे, जिससे विदेशी मुद्रा कमाई बढ़ेगी और औद्योगिक विकास को नई उड़ान मिलेगी।