
चंडीगढ़ के स्वच्छता प्रहरी इंदरजीत सिंह सिद्धू को वर्ष 2026 के लिए सामाजिक कार्य क्षेत्र में पद्मश्री पुरस्कार मिलने की घोषणा ने सभी को गद्गद कर दिया है। केंद्र सरकार का यह सम्मान उनके अथक प्रयासों का पुरस्कार है।
सिद्धू प्रतिदिन सड़कों, पार्कों और सार्वजनिक स्थलों से कचरा चुनते हैं। लोगों के ताने और पागल ठहराने के बावजूद वे विचलित नहीं होते। ‘मुझे गंदगी सहन नहीं होती, यही मेरा मंत्र है।’
पुरस्कार की खुशी में चूर सिद्धू ने कहा, ‘देश का आभार। हमारे जैसे बुजुर्ग को यह मान्यता मिलना सुखद है।’ उन्होंने जोर देकर कहा कि सफाई हर नागरिक का कर्तव्य है। ‘लोग गंदगी फैलाते हैं, शायद उन्हें भाती हो। हम तो नफरत करते हैं और साफ करते हैं।’
बातचीत में भावुक होते हुए उन्होंने बताया कि कचरा हटाते समय मिलने वाले अपमान दुख देते हैं। ‘पागल कहते हैं, लेकिन मैं नहीं हूं। गंदगी ही असली पागलपन है।’
सिद्धू का यह संघर्ष युवाओं के लिए प्रेरणा है। हर कचरा उठाना एक संदेश है—उम्र कोई बाधा नहीं। पिछले साल उनका एक वीडियो वायरल होकर लाखों को प्रेरित कर चुका है। यह पुरस्कार स्वच्छ भारत अभियान को नई गति देगा।