
नई दिल्ली में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के वीर सावरकर को भारत रत्न देने के बयान पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि सावरकर ने अखंड भारत को टुकड़ों में बांट दिया, इसलिए उन्हें देश का सर्वोच्च सम्मान नहीं मिलना चाहिए।
आईएएनएस से विशेष बातचीत में मसूद ने सवाल उठाया, ‘सावरकर को भारत रत्न किस आधार पर? दो-राष्ट्र सिद्धांत के लिए? यह पुरस्कार देश को एकजुट करने वालों के लिए है, बांटने वालों के लिए नहीं।’
उन्होंने जोर देकर कहा कि सावरकर के कार्यों से राष्ट्र को गहरा नुकसान हुआ। भारत रत्न जैसे सम्मान की गरिमा को बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। भागवत का बयान विपक्षी दलों में आक्रोश पैदा कर रहा है।
यूसीसी पर भागवत के बयान पर मसूद ने तंज कसा, ‘क्या अब तक इसकी कोई स्टडी नहीं हुई? बिना अध्ययन के राज्यों में लागू कर आदिवासियों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। जल्द ही इसके दुष्परिणाम सामने आ जाएंगे।’
उत्तर प्रदेश में एसआईआर की समयसीमा बढ़ाने पर मसूद ने कहा, ‘हम केवल बोलते नहीं, कार्रवाई भी कर रहे हैं। फॉर्म-7 के जरिए धोखाधड़ी करने वालों को पकड़ रहे हैं।’
प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण-2026 के तहत मतदाता सूची को शुद्ध किया जा रहा है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि दावे-आपत्तियां 6 मार्च 2026 तक ली जाएंगी। मृत, स्थानांतरित, डुप्लिकेट और अनुपस्थित मतदाताओं पर पारदर्शी कार्रवाई हो रही है।
यह विवाद ऐतिहासिक हस्तियों के सम्मान और नीतिगत सुधारों पर बहस को नई गति दे रहा है। मसूद का रुख कांग्रेस की आक्रामक रणनीति को दर्शाता है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाएगा।