
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में हालिया दो गुटों के बीच हुई झड़प पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि जेएनयू में नफरत की राजनीति फैलाने की साजिश रची जा रही है, जो देश की धर्मनिरपेक्ष विचारधारा का प्रतीक है।
आईएएनएस से बातचीत में मसूद ने स्पष्ट किया कि यह लेफ्ट और एबीवीपी का मुद्दा नहीं है। बल्कि, नफरत का जहर बोने की कोशिश हो रही है। जेएनयू जैसे प्रतिष्ठित संस्थान को निशाना बनाना अत्यंत चिंताजनक है।
पीएम मोदी के एआई समिट में कांग्रेस पर दिए बयान पर उन्होंने पलटवार किया। देश का बंटाधार कांग्रेस ने नहीं, बल्कि केंद्र की सरकार ने किया है। उन्होंने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ एफआईआर पर मसूद ने दुख जताया। इतना दुर्भाग्यपूर्ण कोई कदम नहीं हो सकता। सनातन धर्म के रक्षक कहां हैं? शंकराचार्य जैसे सर्वोच्च पद पर आसीन व्यक्ति पर मुकदमा दर्ज कराना शर्मनाक है। शिकायतकर्ता के पीछे का आधार जांचा जाए।
आठ संदिग्ध आतंकियों की गिरफ्तारी पर उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ कठोर कार्रवाई जरूरी है, लेकिन बेकसूरों को फंसाने से बचें। कई लोग 20-20 साल जेल काटकर निर्दोष साबित होते हैं।
तालिबान के महिलाओं के खिलाफ नए कानूनों पर मसूद ने आश्चर्य जताया। इस्लाम में महिलाओं का जो स्थान है, उसके विपरीत ये नियम हैं। कौन सी किताब से इन्हें लिया गया?
मसूद के बयान राजनीतिक घमासान को नई ऊंचाई दे रहे हैं।