
मथुरा के बलदेव स्थित दाऊजी महाराज मंदिर में होली के ठीक अगले दिन, 5 मार्च को हुरंगा होली का भव्य आयोजन होगा। ब्रज क्षेत्र में होली कोई साधारण पर्व नहीं, बल्कि करीब 40 दिनों का महोत्सव है, जो विभिन्न प्राचीन मंदिरों में अलग-अलग रीति से मनाया जाता है।
इस अनोखे उत्सव में महिलाएं पुरुष हुरियारों के वस्त्र फाड़कर उनसे कोड़े तैयार करती हैं और फिर जोरशोर से पीटती हैं। सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक रंग-टेसू के प्राकृतिक रंगों से सराबोर यह लीला देखने लायक होती है। दुनियाभर में प्रसिद्ध यह कोड़ेमार होली भगवान बलराम और कृष्ण के भाईचारे का प्रतीक है।
मंदिर में 7 फीट ऊंची काली मूर्ति के साथ रेवती जी विराजमान हैं। मथुरा से 25 किमी दूर यह ऐतिहासिक स्थल गोपाल लालजी मंदिर और बलभद्र कुंड के नाम से भी जाना जाता है। होली के समय दूर-दूर से भक्त और सैलानी उमड़ आते हैं।
यह उत्सव गोपियों के प्रेम और भक्ति का जीवंत चित्रण करता है। जब दुनिया में होली समाप्त हो जाती है, तब ब्रज में यह जोश चरम पर होता है। हुरंगा होली ब्रज की सांस्कृतिक धरोहर को संजोए रखती है, जहां आस्था और उल्लास का अनुपम संगम होता है।