
कोलकाता। रवींद्रनाथ टैगोर के पैतृक निवास के लिए मशहूर जोड़ासांको केवल साहित्यिक धरोहर नहीं, बल्कि राजनीतिक उथल-पुथल का केंद्र भी है। ‘जोड़ा’ और ‘सांको’ से बने इस नाम का अर्थ दो पुलों से जुड़ा है, जो कभी नाले पर बने थे। आजादी के बाद कांग्रेस का यह अभेद्य क्षेत्र 1998 में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के उदय से बदल गया।
2001 से पांच विधानसभा चुनावों में टीएमसी ने जीत हासिल की। 2021 में विवेक गुप्ता ने भाजपा की मीना देवी पुरोहित को शिकस्त दी। लेकिन अंतर हमेशा कम रहा- 2001 में 778 वोट, 2006 में 819। मतदाता यहां फैसले सावधानी से लेते हैं।
खास बात यह वोटिंग पैटर्न है। विधानसभा में टीएमसी को समर्थन, लोकसभा में भाजपा आगे। कोलकाता उत्तर के इस सेगमेंट में 2014 में भाजपा को 16,482 वोटों की बढ़त, 2019 में 3,882, 2024 में 7,401। व्यापारी वर्ग राष्ट्रीय मुद्दों पर भाजपा की ओर, स्थानीय पर टीएमसी।
11 वार्डों वाला शहरी क्षेत्र मारवाड़ी, हिंदीभाषी और बंगाली मिश्रण है। रवींद्र सरानी पर व्यापार फल-फूल रहा। आगामी चुनाव में क्या भाजपा सेंध लगाएगी? जोड़ासांको की कहानी बंगाल की दिशा बताएगी।