
‘शोले’ फिल्म ने पिछले साल अपने रिलीज के 50 वर्ष पूरे कर लिए। 15 अगस्त 1975 को प्रदर्शित यह सुपरहिट फिल्म उस दौर की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली बनी। इसकी यादें आज भी ताजा हैं।
मुंबई में हेमा मालिनी के घर पर निर्देशक रमेश सिप्पी का स्वागत हुआ। उन्होंने फिल्म की स्वर्ण जयंती पर सिप्पी की तस्वीर वाली पत्रिका का विमोचन किया। इस मौके पर हेमा ने प्रशंसकों की एक रोचक कहानी साझा की। उन्होंने कहा, ‘मानो धर्मेंद्र जी और मैं शोले के किरदारों में ही जी रहे हों। रामनगर गांव में अमिताभ बच्चन ठाकुर हैं, गब्बर समोसे बेचता है। मैं खाना बनाकर सबको खिलाती हूं।’
यह कथा युवाओं ने सुनाई थी, जो हेमा को बहुत भाई। सिप्पी ने बसंती रोल के चयन की बात बताई। ‘सीता और गीता’ के बाद हिचक हुई, लेकिन हेमा ने स्क्रिप्ट देखते ही हामी भर ली। उनके लंबे डायलॉग याद करने की कला सेट पर सबको हैरान कर गई।
‘जब तक है जान’ गाने की शूटिंग की कठिनाई पर हेमा बोलीं, धूप में नंगे पैर नाचना असहज था। मां ने मना किया था, गर्म पथरों पर चोट लगने का डर था, लेकिन हेमा ने जी-जान लगा दी।
‘शोले’ की 50वीं वर्षगांठ पर ये किस्से फिल्म की अमरता को दर्शाते हैं, जो दर्शकों के दिलों में बसी रहेगी।