
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच को सुप्रीम कोर्ट के जज की सीधी निगरानी में देने की जोरदार मांग की है। ऋषिकेश के एक रिसॉर्ट में नौकरी करने वाली 19 वर्षीय अंकिता की कथित तौर पर मालिक व कर्मचारियों ने हत्या कर दी थी, जिससे पूरे देश में आक्रोश फैल गया।
देहरादून में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रावत ने कहा कि जांच में बार-बार देरी, सबूतों के साथ छेड़छाड़ और राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप लग रहे हैं। ‘यह मामला सुप्रीम कोर्ट के जज की नजरों तले ही आगे बढ़ना चाहिए।’ उन्होंने एसआईटी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पारदर्शिता के बिना न्याय संभव नहीं।
18 सितंबर 2022 को गायब हुई अंकिता का शव चिल्ला नहर से बरामद हुआ। आरोपी पुलकित आर्य, जो बीजेपी नेता के बेटे हैं, ने सरेंडर कर हत्या कबूल की। लेकिन सीसीटीवी फुटेज गायब होने जैसे विवादों ने साजिश के संदेह को जन्म दिया।
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पहले ही एसआईटी को फटकार लगाई और नई टीम गठित की। रावत ने बीजेपी सरकार पर प्रभावशाली लोगों को बचाने का आरोप लगाया। ‘यह केवल एक हत्या का केस नहीं, बल्कि कानून का राज बचाने की लड़ाई है।’
जनता का गुस्सा सड़कों पर उतर आया है। विरोध प्रदर्शन जारी हैं। रावत की मांग से परिवार को न्याय की उम्मीद जगी है। क्या सरकार इस अपील पर अमल करेगी, यह तो समय बताएगा।