
राज्यसभा में गुरुवार को आम आदमी पार्टी के सांसद और पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह ने सोशल मीडिया पर व्याप्त अश्लील सामग्री के दुष्प्रभावों पर चिंता जताई। उन्होंने इसे समाज की नींव हिला देने वाला मुद्दा करार दिया, जो न केवल कानून बल्कि नैतिकता और भावी पीढ़ियों से जुड़ा है।
सोशल मीडिया आज ज्ञान और संवाद का प्रमुख स्रोत है, लेकिन उसी प्लेटफॉर्म पर अशोभनीय कंटेंट का तेज प्रसार हो रहा है, जो बच्चों व किशोरों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रहा। शोध बताते हैं कि कम उम्र के बच्चे इस सामग्री तक आसानी से पहुंच रहे हैं, जिससे उनकी मानसिकता विकृत हो रही है।
हरभजन ने उदाहरण दिया कि 13-14 साल का बच्चा, जो अभी सही-गलत सीख रहा, अश्लील वीडियो देखकर महिलाओं को वस्तु समझने लगे तो सम्मान की भावना कैसे बनेगी। यह सोच अपराधों को जन्म दे सकती है।
विश्व के देशों ने कदम उठाए हैं। फ्रांस ने उम्र सत्यापन अनिवार्य कर वेबसाइटें बंद करने का प्रावधान किया। ब्रिटेन का ऑनलाइन सेफ्टी कानून पहचान जांच करता है, जबकि ऑस्ट्रेलिया में सख्त निगरानी है। भारत को भी तकनीकी व कानूनी उपाय अपनाने होंगे।
उन्होंने निगरानी, आयु प्रमाणीकरण और कठोर दंड की मांग की। सोशल मीडिया शिक्षा के लिए हो, न कि समाज को विषाक्त करने के लिए। अभिव्यक्ति स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है, पर बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि।