
परीक्षाओं में नकल की बढ़ती प्रवृत्ति को रोकने के लिए राज्यपाल ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने शिक्षा अधिकारियों को नकल में लिप्त पाए गए छात्रों के अभिभावकों को तलब करने और उनसे संवाद करने का आदेश दिया है। यह कदम शैक्षणिक ईमानदारी को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
राज्यपाल ने हाल ही में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में कहा कि अभिभावक अपने बच्चों की गतिविधियों के लिए जिम्मेदार हैं। नकल के मामलों में केवल छात्रों को दंडित करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। परिवारों को शामिल करके ही जड़ से इसे रोका जा सकता है।
निर्देशों के अनुसार, परीक्षा केंद्रों पर नकल पकड़े जाने पर तत्काल अभिभावकों को सूचना दी जाएगी। फिर स्कूल स्तर पर परामर्श सत्र आयोजित होंगे, जहां कारणों पर चर्चा होगी और सुधारात्मक कदम सुझाए जाएंगे। शिक्षा विभाग ने इसे अगले सत्र से लागू करने का लक्ष्य रखा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पारंपरिक सजा से हटकर एक सकारात्मक बदलाव है। पहले केवल छात्रों पर कार्रवाई होती थी, अब माता-पिता की भूमिका पर जोर दिया जा रहा है। इससे न केवल नकल कम होगी, बल्कि पारिवारिक जागरूकता भी बढ़ेगी।
राज्य भर के स्कूल प्रमुख कार्ययोजनाएं तैयार कर रहे हैं। अभिभावक-शिक्षक संघ भी सहयोग के लिए तैयार हैं। राज्यपाल ने चेतावनी दी कि निगरानी सख्त रहेगी और उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह पहल शैक्षणिक सुधारों की नई मिसाल बन सकती है।