
केंद्र सरकार ने देशभक्ति के प्रतीक वंदे मातरम को सरकारी समारोहों में अनिवार्य बनाते हुए इसके गायन के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए हैं। गृह मंत्रालय द्वारा बुधवार को प्रसारित ये निर्देश सार्वजनिक और आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगान के साथ इसके क्रम और आचरण को स्पष्ट करते हैं।
दिशानिर्देशों में छह श्लोकों वाले पूर्ण आधिकारिक संस्करण को प्रमुखता से राष्ट्रीय ध्वज फहराने, राष्ट्रपति एवं राज्यपालों के औपचारिक आगमन-प्रस्थान तथा उनके भाषणों से पूर्व-उत्तर प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है। इसकी अवधि करीब 3 मिनट 10 सेकंड है।
यदि किसी आयोजन में वंदे मातरम और राष्ट्रगान दोनों शामिल हों, तो पहले राष्ट्रगीत गाया जाएगा, फिर राष्ट्रगान। दर्शकों को दोनों के दौरान सावधान खड़े रहने का निर्देश है।
शिक्षण संस्थानों से दैनिक प्रार्थना सभाओं और महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में इसे गाने को प्रोत्साहन देने को कहा गया है, ताकि छात्रों में राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान जागे।
बैंड प्रदर्शन से पूर्व ढोल या बिगुल की ध्वनि अनिवार्य है। सिनेमाघरों को छूट मिली है—फिल्म साउंडट्रैक में बजने पर खड़े होने की जरूरत नहीं, जिससे दर्शकों का अनुभव प्रभावित न हो।
ये कदम राष्ट्रगीत के प्रोटोकॉल में लंबे समय की कमी को पूरा करते हैं, राष्ट्रगान के समकक्ष लाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।