
आपदा की घड़ी में शुरुआती गोल्डन ऑवर जीवन-मरण का प्रश्न बन जाता है। भारतीय सेना की पश्चिमी कमान ने चंडीमंदिर में आयोजित सम्मेलन में ऐसे क्रांतिकारी समाधान पेश किए, जो संपूर्ण तबाही के बावजूद संचार को जीवित रखते हैं।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के साथ साझेदारी में नेक्स्ट-जन तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित पूर्व चेतावनी प्रणालियां प्रदर्शित की गईं। भूस्खलन, बाढ़ जैसी आपदाओं के लिए उपग्रह-लिंक्ड संचार मॉड्यूल मुख्य आकर्षण बने, जो नेटवर्क विफल होने पर भी सक्रिय रहते हैं।
पश्चिमी कमान के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार ने कहा कि तकनीक, रणनीति और मानवीय साहस का संगम ‘जीरो-फेल’ मिशन सुनिश्चित करता है। एनडीएमए सचिव मनीष भारद्वाज और अन्य विशेषज्ञों ने गोल्डन ऑवर के इष्टतम उपयोग पर प्रोटोकॉल पर चर्चा की।
आईआईटी मंडी के विशेषज्ञों ने रिमोट सेंसिंग से भूस्खलन पूर्वानुमान की सफलताएं दिखाईं। एनडीआरएफ ने बाढ़ प्रबंधन की चुनौतियों का विश्लेषण किया और शहरी-ग्रामीण समाधान सुझाए।
उच्च ऊंचाई बचाव उपकरण, सीबीआरएन सूट और ट्रॉमा किट जैसे उपकरणों का प्रदर्शन हुआ। 2026 के लिए संयुक्त प्रशिक्षण और एकीकृत कमांड संरचना पर एक्शन प्लान बने।
यह आयोजन अंतर-एजेंसी सहयोग का नया मानदंड स्थापित करता है, जो भारत को आपदाओं से लड़ने के लिए तैयार करता है।