
ब्रज की पावन धरती गोकुल में छड़ीमार होली का अनुपम दृश्य देखने को मिला। श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े इस अनोखे उत्सव में भक्तों ने रंग-गुलाल उड़ाते हुए प्रेमपूर्ण छड़ी वार किए। मथुरा के इस क्षेत्र में होली का आगाज़ 25 फरवरी से ही हो चुका है और अब गोकुल की गलियों में भक्ति का रंग छाया हुआ है।
महिलाएं राधा रानी की सखियों के रूप में सजीं, वहीं पुरुष ग्वाले बने। हाथों में छड़ी थामे सबने एक-दूसरे पर कोमल प्रहार किए। एक भक्त ने बताया, ‘यह बालकृष्ण की होली है। छड़ी से रंग लगाने की परंपरा सदियों पुरानी है, जो श्रीकृष्ण को सीधे रंग न लगे, इसके लिए अपनाई जाती है।’
एक माह पूर्व से ही तैयारियां चल रही थीं। रसिया गीतों की धुन पर नाचते-गाते भक्त जय श्रीकृष्ण के नारों से वातावरण गुंजायमान कर रहे थे। भारी भीड़ के बीच यह होली भक्ति और उल्लास का संगम बनी।
दूर-दूर से आए श्रद्धालु इस दर्शन का लाभ उठा रहे थे। वहीं प्रयागराज के सनातनी किन्नर अखाड़े में आचार्य कौशल्या नंद गिरी के नेतृत्व में होली पूजन हुआ। उन्होंने कहा, ‘होली रंगों से अधिक खुशियों का त्योहार है। सभी की मनोकामनाएं पूरी हों।’