
नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि कृषि अपशिष्ट, जो आज परेशानी का सबब बन गया है, उसे देश का उपयोगी संसाधन बनाया जा सकता है। हर साल खेतों से निकलने वाले फसल अवशेषों को जलाने के बजाय बायोफ्यूल, बायोगैस और बिजली में बदला जा सकता है।
एक कार्यक्रम में बोलते हुए गडकरी ने बताया कि भारत में प्रतिवर्ष 50 करोड़ टन से अधिक कृषि अपशिष्ट उत्पन्न होता है। पंजाब-हरियाणा में पराली जलाने से दिल्ली की हवा जहरीली हो जाती है। लेकिन अब समय आ गया है बदलाव का। उन्होंने उद्योगों के सफल मॉडल साझा किए, जहां चावल की पराली से बिजली बन रही है और गन्ने का बगास ईंधन का काम कर रहा है।
राष्ट्रीय बायोएनर्जी कार्यक्रम के तहत 2025 तक 5 हजार संपीडित बायोगैस संयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य है। प्रत्येक संयंत्र रोजाना 200 टन अपशिष्ट प्रसंस्कृत करेगा, लाखों नौकरियां पैदा करेगा और जीवाश्म ईंधन आयात घटाएगा।
गडकरी ने निजी कंपनियों के साथ साझेदारी का जिक्र किया, जहां किसानों को पराली के बदले पैसे मिल रहे हैं। चुनौतियां हैं- मशीनरी की लागत, जागरूकता। फिर भी, उन्होंने भरोसा जताया कि तकनीक और नीतियों से यह क्रांति लाएगा।
यह बदलाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा, प्रदूषण रोकेगा। गडकरी का संदेश साफ है- कचरा कल का खजाना है।