
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार द्वारा 2026 के पद्म पुरस्कारों की घोषणा में बिहार के तीन प्रमुख व्यक्तियों को पद्मश्री से सम्मानित किया गया। इनमें विज्ञान एवं अभियंत्रण क्षेत्र के गोपालजी त्रिवेदी का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है। मुजफ्फरपुर के ग्रामीण परिवेश से निकलकर उन्होंने कृषि क्रांति का ऐसा चेहरा गढ़ा जो आज भी किसानों को प्रेरित करता है।
मुजफ्फरपुर जिले के बंदरा प्रखंड स्थित मतलुपुर गांव में एक साधारण किसान परिवार में जन्मे गोपालजी का बचपन खेतों-खलिहानों में बीता। किसानों की कठिनाइयों को करीब से देखा, जिसने उन्हें विज्ञान की ओर प्रेरित किया। प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही हुई, मैट्रिक पूसा उच्च विद्यालय से और इंटरमीडिएट लंगट सिंह कॉलेज से पूरी की।
परिवारिक बाधाओं के कारण उच्च शिक्षा बीच में रुक गई और उन्हें खेती करनी पड़ी। लेकिन हिम्मत नहीं हारी। पूसा विद्यालय में शिक्षक पद मिला, जिसके बाद कृषि विश्वविद्यालय में दाखिला लिया। बीएससी, एमएससी और पीएचडी प्राप्त की। तिरहुत कृषि कॉलेज में प्रोफेसर बने और पूसा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति तक पहुंचे।
उनकी आधुनिक कृषि तकनीकों ने किसानों की उपज बढ़ाई और आय में वृद्धि की। प्रयोगशाला के वैज्ञानिक कार्यों को खेतों तक पहुंचाया। सेवानिवृत्ति के बाद भी ग्रामीणों से जुड़े रहते हैं। यह सम्मान उनकी मेहनत का प्रमाण है जो ग्रामीण भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।