
बॉलीवुड ने हमेशा उद्यमिता की भावना को दर्शाया है। ‘गुरु’ और ‘बैंड बाजा बारात’ जैसी फिल्में जीरो से हीरो बनने की सच्ची कहानी बयां करती हैं। ये सपनों, जोखिमों और जीत की मिसाल हैं।
2007 की ‘गुरु’ में अभिषेक बच्चन ने गुरुकांत देसाई का किरदार निभाया, जो गांव से निकलकर देश का सबसे अमीर आदमी बनता है। धीरूभाई अंबानी से प्रेरित यह फिल्म भ्रष्टाचार, सत्ता संघर्ष और व्यापारिक चालाकी दिखाती है। गुड़ से कपड़ा तक का सफर प्रेरणादायक है।
2010 की ‘बैंड बाजा बारात’ में रणवीर सिंह और अनुष्का शर्मा दिल्ली में शादी प्लानिंग का स्टार्टअप शुरू करते हैं। क्लाइंट्स की जिद, पार्टनरशिप की खटपट और बाजार की होड़ से जूझते हुए वे सफल होते हैं। यह फिल्म पार्टनरशिप और इनोवेशन पर जोर देती है।
भारत के स्टार्टअप बूम में ये कहानियां प्रासंगिक हैं। 100 यूनिकॉर्न्स के दौर में ये फिल्में हिम्मत सिखाती हैं। ‘गुरु’ सिस्टम से लड़ना बताता है, तो ‘बीबीबी’ सर्विस सेक्टर की ताकत।
‘रॉकेट सिंह’ जैसी अन्य फिल्में नैतिक व्यापार सिखाती हैं। स्टार्टअप इंडिया के जमाने में बॉलीवुड युवाओं को प्रोत्साहित करता रहेगा।