
राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के सांसद ऋताब्रत बनर्जी ने संसद के जीरो आवर में पश्चिम बंगाल के 12 वीर स्वतंत्रता सेनानियों की अनसुनी कुर्बानी पर रोशनी डाली। 1908-09 के अलीपुर बम कांड के बाद ये क्रांतिकारी अंडमान की सेलुलर जेल भेजे गए थे, जहां उन्होंने कठोर यातनाएं सहीं।
बरिंद्र घोष, उल्लास्कर दत्त और हेमचंद्र कानूनगो जैसे नेताओं ने बिना किसी समझौते के ब्रिटिश राज के खिलाफ बगावत की। घोष ने जुगांतर और अनुशीलन समितियों के जरिए बम इकाइयां और गुप्त नेटवर्क बनाए। दत्त बम बनाने के विशेषज्ञ थे, तो कानूनगो ने पेरिस से विस्फोटक ज्ञान लाया।
इन 12 वीरों को उम्रकैद और देश निकाला मिला। काला पानी जेल में अकेलापन, तेल घानी का कठोर श्रम और अमानवीय हालातों का सामना किया, फिर भी हार न मानी। बनर्जी ने कहा, ‘इन्होंने कभी दया याचिका नहीं दी।’
अलीपुर केस में मुजफ्फरपुर बम कांड समेत ब्रिटिश अफसरों पर हमलों के आरोप थे। कुछ को फांसी की सजा उम्रकैद में बदली गई। बनर्जी ने अपील की कि इन बंगाली क्रांतिकारियों को सच्चा सम्मान मिले। 1909-21 में जेल के शुरुआती 46 कैदी बंगाली थे। देश इनकी बेमिसाल वीरता को हमेशा याद रखे।