
भारत का अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव आसमान को रंगीन परछाइयों से सजा देता है। दूसरे देशों से आए पतंग उड़ाने वाले कलाकारों ने इसे शानदार अनुभव बताया। स्पेन के जावियर ने कहा, ‘यह जादू जैसा है।’ उनके विशाल पतंगें आकाश में उड़ान भर रही थीं।
हर साल आयोजित यह उत्सव खेतों को पतंगों के रणक्षेत्र में बदल देता है। इस बार 20 से अधिक देशों के प्रतिभागियों ने अपनी अनोखी डिजाइनों से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। हवा में चीखने वाली लड़ाकू पतंगें और हंसी-ठहाकों की गूंज ने माहौल को जीवंत बना दिया।
विदेशी मेहमानों के लिए यह भारत की पतंग उड़ाने की परंपरा से पहली मुलाकात थी। जापान की ऐको बोलीं, ‘यहां का जोश कहीं और नहीं मिलता।’ स्थानीय विशेषज्ञों ने पुरानी तरकीबें सिखाईं, जिससे नौसिखियों ने भी पतंगों को हवा में नचाना सीख लिया।
सूरज ढलते ही आकाश स्वर्णिम रंगों से नहा गया। विशाल पतंगों की जंग और छोटी पतंगों के आकृतियां देखने लायक थीं। ब्राजील के मिगुएल ने कहा, ‘भारत ने जीवन भर की यादें दीं।’ यह महोत्सव खेल ही नहीं, संस्कृतियों के मेल का प्रतीक बना।