
नई दिल्ली। दिसंबर महीने में कृषि और ग्रामीण श्रमिकों को खाद्य महंगाई में राहत मिली है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अनुसार, अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई-एएल) 0.04 प्रतिशत और सीपीआई-आरएल 0.11 प्रतिशत रहा।
खास बात यह है कि खाद्य महंगाई कृषि श्रमिकों के लिए -1.8 प्रतिशत और ग्रामीण श्रमिकों के लिए -1.73 प्रतिशत रही। उत्पादन में वृद्धि से अनाज, सब्जियों और अन्य खाद्य पदार्थों के दाम घटे हैं, जो इन वर्गों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं।
ये परिवार जहां भोजन पर सबसे ज्यादा खर्च करते हैं, वहां नकारात्मक महंगाई से क्रय शक्ति बढ़ी है। इससे जीवनयापन बेहतर हो रहा है और आर्थिक दबाव कम हो रहा है।
मंत्रालय के श्रम ब्यूरो ने जून से आधार वर्ष 2019=100 अपनाया है। यह 787 गांवों से एकत्र आंकड़ों पर आधारित है, जो पुरानी 1986-87 सीरीज से कहीं अधिक विश्वसनीय है। इसमें कवरेज बढ़ाया गया है और कार्यप्रणाली में सुधार किए गए हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर खुदरा महंगाई 1.33 प्रतिशत और थोक महंगाई 0.83 प्रतिशत रही। आरबीआई का अनुमान है कि वित्त वर्ष 26 में खुदरा महंगाई लगभग 2 प्रतिशत रहेगी, जीएसटी कटौती और खाद्य मूल्यों में नरमी से।
यह रुझान ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायक होगा, बशर्ते उत्पादकता बनी रहे।