
संनातन धर्म में पंचांग जीवन की हर सांस को निर्देशित करने वाला मार्गदर्शक है। यह शुभ मुहूर्त और अशुभ काल की सटीक जानकारी देता है। 26 फरवरी को गुरुवार है, जो भगवान नारायण और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित। इस दिन रवि योग का प्रभाव रहेगा, जो सौभाग्य लेकर आता है।
शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि रात्रि 12:33 बजे तक रहेगी, उसके बाद एकादशी प्रारंभ। पंचांग के पांच अंग- तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण- अलग-अलग फल देते हैं। दृक पंचांग के अनुसार, मृगशिरा नक्षत्र दोपहर 12:11 तक, फिर आर्द्रा। प्रीति योग रात 10:33 तक। सूर्योदय 6:49 और सूर्यास्त 6:19 बजे।
मुहूर्तों में अभिजित दोपहर 12:11 से 12:57, विजय 2:29 से 3:15 बजे शुभ कार्यों हेतु। ब्रह्म मुहूर्त प्रात: 5:09 से 5:59, गोधूलि सायं 6:16 से 6:42, अमृत काल रात्रि 1:23 से 2:53 बजे। रवि योग सम्पूर्ण दिवस प्रभावशाली।
अशुभ समय: राहुकाल 2:00 से 3:27, यमगंड 6:49 से 8:16, गुलिक 9:42 से 11:08, दुर्मुहूर्त 10:39 से 11:25 बजे। इनसे बचें।
गुरुवार को नारायण पूजन, पीले भोजन, पीत वस्त्र, हल्दी तिलक करें। दान-पुण्य से जीवन सुखमय बनेगा।