
बिहार के समस्तीपुर जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना ने इलाके को स्तब्ध कर दिया है। जहरीली शराब पीने से एक पिता की जान चली गई, जबकि उसके बेटे की रोशनी हमेशा के लिए खो गई। यह हृदयविदारक मामला ग्रामीण भारत में नकली शराब के बढ़ते खतरे को उजागर करता है।
रामू यादव नामक मजदूर और उनका 22 वर्षीय बेटा रवि स्थानीय समारोह में जहरीली देशी शराब पी चुके थे। कुछ ही घंटों बाद दोनों को उल्टी, दर्द और दौरा पड़ा। पड़ोसियों ने उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, लेकिन रामू की सांसें थम गईं।
चिकित्सकों ने मेथनॉल की मौजूदगी की पुष्टि की, जो नकली शराब में मिलाया जाने वाला घातक रसायन है। रवि की आंखों को भारी नुकसान पहुंचा और जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने स्थायी अंधत्व की घोषणा कर दी। उन्होंने बताया कि समय पर इलाज से शायद बचाव हो सकता था।
पुलिस ने ताबड़तोड़ छापेमारी की और कई अवैध भट्टियां ध्वस्त कर दीं। सैकड़ों लीटर संदिग्ध शराब जब्त हुई तथा तीन अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। जांच से पता चला कि कृषि गतिविधियों के आड़ में एक गिरोह सक्रिय था।
बिहार में 2016 से लागू शराबबंदी के बावजूद अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। पिछले एक साल में दर्जनों मौतें हो चुकी हैं। ग्रामीणों ने मुआवजे और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग की है। राजनीतिक नेता आश्वासन दे रहे हैं, लेकिन जनता संशय में है। यह घटना जहर के व्यापार को जड़ से उखाड़ने की आवश्यकता पर जोर देती है।